Mandiro ka jirodhar

आज़ादी के ७७ साल हो गये, आप ne से सभी किसी ना किसी बड़े मंदिर ज़रूर गये होंगे. २०१४ के पहले और उसके बाद मंदिरों की स्तिथि में बदलाव दिख रहा है कि नहीं और ख़ासकर हिन्दी भासी बेल्ट में.



साउथ भारत के मंदिर बहुत भव्य है लेकिन आप काशी विश्वनाथ, प्रभु श्री राम के मंदिर अयोध्या, माँ विंध्यवासिनी के मंदिर, विंध्याचल, बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन अगर २०१४ के पहले गये हो और २०२० के बाद उन्हीं मंदिरों में गये हो तो आपको लगेगा कि मोदी/योगी ने क्या किया है हिन्दुत्व के लिए. मैं २०१७ की बाद आज २०२४ में आया हूँ माँ विंध्यवासिनी के दरबार में और मुझे अंतर दिख रहाँ हैं. भव्य बन रहाँ है माता का दरबार. सोचिए आप के आराध्य के लिए क्या किया हैं कांग्रेस ने और बाक़ी दलों ने. सोमनाथ के मंदिर में जाने के लिए देश के राष्ट्रपति राजेंद्र बाबू को मना कर दिया था जवाहर लाल नेहरू ने लेकिन वो गये.

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